क्या दादी इंदिरा के रास्ते पर चलेंगे राहुल गांधी? अमेठी और रायबरेली में कांग्रेस के कैंडिडेट को लेकर सस्पेंस बरकरार


 

नई दिल्ली, 10 मार्च 2024। लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने पहली लिस्ट जारी कर दी है. इसमें 39 नामों का ऐलान किया गया है. राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने के ऐलान के साथ ही ये चर्चा भी तेज हो गई कि क्या राहुल गांधी 2 सीटों से चुनाव लड़ेंगे. क्या राहुल गांधी अमेठी से इस बार चुनाव लड़ेंगे. इतना ही नहीं, रायबरेली की सीट का क्या होगा. क्या सोनिया गांधी के सीट छोड़ने के बाद जिम्मेदारी प्रियंका गांधी संभालेंगी या इस बार यूपी में चुनाव बिना गांधी परिवार के होने वाला है. आखिर क्या है कांग्रेस का आगे का प्लान... 

राहुल की वायनाड सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान हुआ तो चर्चा अमेठी की होने लगी. प्रेस कॉफ्रेंस में साफ सवाल किया गया कि क्या राहुल गांधी वायनाड के साथ अमेठी से चुनाव लड़ेंगे, क्या राहुल गांधी इस बार भी दो सीटों से उम्मीदवारी भरेंगे. सवाल सिर्फ राहुल गांधी के अमेठी से चुनाव लड़ने का नहीं है, बल्कि सवाल रायबरेली सीट का भी है, जहां से सांसद सोनिया गांधी ने इस बार राज्यसभा से संसद जाने का रास्ता तय किया है. अब सवाल ये कि क्या इस बार प्रियंका गांधी सक्रिय राजनीति में डेब्यू करेंगी और अगर करेंगी तो क्या रायबरेली सीट से चुनाव लड़ेंगी या फिर ये सीट भी गांधी परिवार छोड़ने वाला है.

भले ही कांग्रेस ने यूपी को लेकर अपनी लिस्ट जारी नहीं की हो, लेकिन सवाल ये है कि क्या यूपी की जंग बिना गांधी परिवार के होगी. वो गांधी परिवार, जिसने नेहरू के वक्त से यूपी को अपनी कर्मभूमि बनाया. इंदिया गांधी, राजीव गांधी से लेकर सोनिया और फिर राहुल गांधी तक देश के सबसे बड़े सूबे से सियासी हुंकार भरते नजर आए. कांग्रेस अमेठी को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रही. राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी अमेठी पहुंचे थे, लेकिन एक बार भी उनके अंदाज में नजर नहीं आया कि वो अमेठी से चुनाव लड़ेंगे. वहीं बीजेपी अमेठी को लेकर आ रहे फैसले में देरी पर लगातार तंज कस रही है.

क्या हार का हिसाब-किताब बराबर करेगी कांग्रेस?

साल 2019 लोकसभा चुनाव में भी राहुल ने अमेठी के साथ-साथ केरल के वायनाड से चुनाव लड़ा था. उस दौरान राहुल को स्मृति ईरानी के सामने अमेठी में हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद राहुल गांधी की अमेठी में सक्रियता भी कम हो गई, लेकिन वायनाड में कांग्रेस की मजबूती को देखते हुए सवाल उठे कि क्या स्मृति ईरानी से हिसाब चुकता करने के लिए राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ेंगे?

इंदिरा ने ऐसे की थी वापसी

बता दें कि गांधी परिवार को पहले भी हार मिल चुकी है. जब रायबरेली से इंदिरा गांधी को भी शिकस्त मिली थी. 1977 में उन्हें समाजवादी नेता राजनारायण ने हराया था, लेकिन अगले ही चुनाव में इंदिरा गांधी ने वापसी की और चुनाव जीता. सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी भी अपनी दादी के रास्ते पर चलेंगे? या फिर इस बार अमेठी की जनता को अलविदा कहेंगे.

रायबरेली की जनता के नाम सोनिया का भावुक खत

क्या गांधी परिवार 80 लोकसभा सीट वाले उत्तर प्रदेश को इस तरह छोड़ सकता है. क्या ऐसा करने से उसकी वापसी मुश्किल नहीं हो जाएगी? वहीं, उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ने का असमंजस प्रियंका गांधी को लेकर भी है, क्योंकि रायबरेली की अहमियत सोनिया गांधी भी जानती हैं, जब उन्होंने राज्यसभा के लिए नामांकन किया तो रायबरेली की जनता के नाम भावुक खत भी जारी किया था, जहां उन्होंने रायबरेली को अपना परिवार बताया था. सोनिया गांधी ने कहा था कि मेरा परिवार दिल्ली में अधूरा है, ये रायबरेली आकर आप लोगों से मिलकर पूरा होता है. ये नेह-नाता बहुत पुराना है और अपने ससुराल से मुझे सौभाग्य में मिला है. अपनी चिट्ठी के आखिर में बड़ी उम्मीदों के साथ सोनिया गांधी ने लिखा था कि मुझे पता है आप भी हर मुश्किल में मुझे और मेरे परिवार को वैसे ही संभाल लेंगे. सवाल इसलिए भी अहम हो जाते हैं, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में उत्तर भारत के राज्यों से मिली हार के बाद कांग्रेस पर दक्षिण भारत तक सीमीत रहने का तमगा बढ़ता जा रहा है. क्योंकि राहुल के कई बयानों को बीजेपी ने दक्षिण बनाम उत्तर की सियासत का रंग दिया है. ऐसे में अब सबकी नजरें गांधी परिवार की यूपी की दो2सीटों पर लगी हुई हैं, जो कांग्रेस की आगे की रणनीति की तस्वीर साफ करेगी।



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