बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन से आत्मनिर्भरता की ओर


रायपुर, 17 जनवरी 2026 छत्तीसगढ़ में मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ग्रामीण युवाओं के लिए आजीविका का सशक्त माध्यम बन रही है। कोरबा जिले के विकासखंड करतला अंतर्गत ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर मछली पालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है और सीमित संसाधन के बावजूद अधिक उत्पादन कर वर्ष भर में 3 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है।

संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल निजी भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक के अंतर्गत तालाब में विशेष लाइनर बिछाकर नियंत्रित वातावरण में पानी भरा जाता है, जिसमें तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। बॉयोफ्लॉक तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कम पानी और कम भूमि में अधिक उत्पादन होता है तथा वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत शासन द्वारा संजय सुमन को 8 लाख 40 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इस सहयोग से उन्होंने आधुनिक तकनीक आधारित मत्स्य पालन की शुरुआत की। पिछले वर्ष बॉयोफ्लॉक तालाब से लगभग 6 मैट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ, जिसकी बिक्री से उन्हें 7 लाख 20 हजार रुपये की कुल आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत घटाने के बाद उन्हें 3 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।

अपनी सफलता से उत्साहित सुमन अब इस वर्ष उत्पादन क्षमता बढ़ाकर आय को दुगुना करने की योजना पर कार्य कर रहे हैं। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं और तकनीकी मार्गदर्शन से परंपरागत कृषि के साथ मत्स्य पालन भी स्थायी और लाभकारी व्यवसाय बन सकता है। उनकी सफलता क्षेत्र के अन्य किसानों और युवाओं के लिए अनुकरणीय बन गई है। 


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