रायपुर, 15 जनवरी 2026 मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत नागपुर की ममता राय आज इस बात की जीवंत उदाहरण हैं कि यदि सही अवसर, मार्गदर्शन और साहस मिल जाए, तो ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत लिख सकती हैं। कभी सीमित संसाधनों में गुजर-बसर करने वाली ममता राय अब सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचानी जाती हैं। वे “प्रगति महिला स्व-सहायता समूह” की सक्रिय सदस्य हैं और किराना-जनरल स्टोर के साथ-साथ आचार, पापड़ और बड़ी निर्माण जैसे विविध आजीविका कार्यों के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक दशा बदल रही हैं।
बदलाव की यह कहानी छत्तीसगढ़ शासन की “बिहान योजना” से शुरू हुई। मार्च 2022 में उन्हें कुल 70,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई, जिसमें ब्प्थ् एवं बैंक लिंकेज ऋण शामिल था। इस राशि का उन्होंने दूरदर्शिता के साथ सदुपयोग किया-गांव में किराना एवं जनरल स्टोर शुरू किया, साथ ही आचार-पापड़-बड़ी निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री खरीदी। शुरूआती चुनौतियों के बाद उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती गई और उनका छोटा-सा उद्यम आज स्थिर आय का मजबूत स्रोत बन चुका है।
वर्तमान में ममता राय की मासिक आय 3,000 से 4,000 रुपए तक पहुँच चुकी है। इस आय से वे परिवार का भरण-पोषण करने के साथ-साथ समय पर ऋण की किश्तों का भुगतान भी कर रही हैं। सबसे बड़ी बात-उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ममता मुस्कुराते हुए कहती हैं, “समूह से जुड़ने और शासन की सहायता मिलने के बाद मुझे लगा कि मैं भी कुछ कर सकती हूँ। अब मैं अपने पैरों पर खड़ी हूँ।”
ममता राय की यह सफलता केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है। उनकी उपलब्धि अन्य महिलाओं को भी प्रेरित कर रही है कि वे आगे बढ़ें, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनें। ममता साबित करती हैं कि यदि हौसला हो तो सपने गाँव की पगडंडियों से निकलकर सफलता की मुख्य सड़क तक पहुँच ही जाते हैं।


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